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बुधवार, 10 नवंबर 2010

बहुत सभाल कर रहना होगा राज ठाकरे को


महाराष्‍ट्र के नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के नाम की घोषणा का जहा सभी वर्गों द्वारा स्वागत किया जा रहा है, वही मनसे प्रमुख राज ठाकरे के माथे पर चिंता की लकीरे खिचती नजर आ रही है. पिछले सीएम अशोकराव से राज ठाकरे की अच्छी बनती थी. अब पृथ्वीराज किस तरह पेश आएगे, ठाकरे के लिए यह एक चिंता का विषय है. राज ठाकरे ने कहा है कि चव्‍हाण महाराष्‍ट्र के हैं और उन्‍हें मुख्‍यमंत्री पद की शपथ मराठी में लेनी चाहिए। नवनिर्वाचित मुख्‍यमंत्री पृथ्‍वीराज को सत्‍ता संभालने से पहले ही मनसे प्रमुख की चुनौती मिली है। राज ठाकरे ने पृथ्वीराज चव्हाण से कहा है वह मराठी में शपथ लें।
राज ठाकरे ने मुंबई को बंबई कहने पर चव्हाण की अलोचना भी की है.राज ठाकरे ने कहा, ' पृथ्वीराज चव्हाण ने भले ही उत्तर भारत में काम किया है और वह अच्छी हिंदी जानते हैं, लेकिन मूल रूप से वह कराड़ (पश्चिम महाराष्‍ट्र) के रहने वाले हैं। इसलिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें मराठी में शपथ लेनी चाहिए।'केंद्र सरकार में विज्ञान एवं तकनीकी विभाग में राज्य मंत्री पृथ्वीराज को महाराष्‍ट्र का नया मुख्‍यमंत्री चुना गया है। वह प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍य मंत्री भी थे। आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में लिप्त पाए गए अशोक चव्हाण की विदाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पृथ्वीराज को महाराष्‍ट्र का नया मुख्‍यमंत्री बना दिया है.चव्हाण ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बंबई शब्द का इस्तेमाल किया था। राज ठाकरे ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, ' चव्हाण को मुंबई शब्द के लिए जाप करना चाहिए और इस राज्य से परिचित होना चाहिए।' इस मामले को अगर गौर से देखा जाए तो राज ठाकरे की तकलीफ साफ़ जाहिर होती है, क्योकि पृथ्वीराज दिल्ली दरबार से ताल्लुक रखते है और वो किसी भी कीमत पर वो सब नही होने देगे, जो अशोकराव के कार्यकाल मे हुआ करता था. अशोकराव ने राज को सब कुछ करने की खुली छूट दे रखी थी. शायद अब पृथ्वीराज वैसा नही होने देगे. संभवतः इसी भावी खतरे को भापते हुए राज ने चेतावनी के लहजे मे नए सीएम से पंगे भरी बात कह डाली है. अब देखना है चव्हाण मुख्यमंत्री के रूप मे राज से किस तरह निपटते है.हर किसी की नजर इसी ओर लगी है. चूकि पृथ्वीराज दिल्ली से आयात करके लाये गए है, इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है.... वो कम से कम सोनिया का आदेश पालने मे जरा भी कोताही नही करेगे.अगर ऐसा हुआ तो, यह भी तय है ...राज को बहुत सभाल कर रहना होगा वर्ना .....--

1 टिप्पणी:

सुरभि सलोनी ने कहा…

सर सही बात कही आपने, शायद अब राज "राज" न रह जाए.... क्योंकि अब बहुत सारी चीजें पहले जैसी नहीं रह गई है...