Advt

बुधवार, 12 नवंबर 2008

जरुरत बने आरोपी


मालेगांव धमाके के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस की आतंक विरोधी टीम द्वारा हिरासत में लिए गए लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को शिवसेना अगले लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है।शिवसेना द्वारा भगवा सहानुभूति बटोरने की इस कोशिश ने तमाम राजनैतिक हलको में चर्चा का रूप ले लिया है। पता चला है कि शिवसेना ने अभी इस बारे कोई फैसला नहीं लिया है लेकिन अगर पुरोहित को उम्मीदवार बनाया जाता है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए,क्योकि शिवसेना ने शुरू से ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर,कर्नल पुरोहित और अन्य आरोपियों की पक्षधर रही। ऐसा वह महाराष्ट्र के हिंदू मतदाताओं पर अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए कर रही है।चर्चा है कि मराठी बनाम बाहरी के मुद्दे पर राज ठाकरे से ख़ुद को पिछड़ती देख शिवसेना को लगता है कि पुरोहित को उम्मीदवार बनाए जाने से उसकी कट्टर हिंदूवादी छवि और मजबूत होगी। शिवसेना प्रमुख बल ठाकरे शुरू से ही मालेगांव ब्लास्ट के आरोपियों का खुलकर बचाव करते रहे। शिवसेना की एक महिला कार्यकर्त्ता ने जनहित याचिका दायर करके मालेगांव ब्लास्ट की जांच एटीएस से वापस लेकर सीआईडी को सौंपे जाने की मांग भी की है। इसके अलावा पुरोहित व साध्वी प्रज्ञा के समर्थन में कई बार शिवसैनिकों ने नारे भी लगाये हैं। अब सवाल उठता है की अपनी पार्टी को मज़बूत करने के लिए शिवसेना ये क्या करने जा रही है।ख़ुद को राष्ट्रवादी दल कहने वाली शिवसेना ने अगर कर्नल पुरोहित को अपनी पार्टी की उम्मीदवारी दी ,तो सियासी मंचों पर उसकी छीछालेदर होने से नही बचेगी। अपना जनाधार बनाये रखने के लिए शिवसेना ही नही तमाम अन्य पार्टियों ने भी इस तरह के हथकंडे पूर्व में अपनाए है। मुंबई बम धमाकों के आरोपियों से लेकर चम्बल घाटी के तमाम दस्यु सरगना विभिन्न पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। बड़ा उदहारण फूलनदेवी का रहा,जिस पर दर्ज़न भर से ज्यादा कत्ल के आरोप होने के बावजूद समाजवादी पार्टी ने सांसद बना दिया। इसके आलावा भी कई उदहारण है जो राजनैतिक अपराधीकरण के प्रमाण हैं। शिवसेना की नज़र जहाँ कर्नल पर लगी है ,वही भाजपा साध्वी प्रज्ञा को मैदान में उतारने का मन बना रही है। तभी तो बीजेपी नेता लालकृष्ण अडवाणी और पार्टी के मुखिया राजनाथ सिंह इनकी गिरफ्तारी के बाद से ही हय तौबा मचाये हुए हैं। उन्हें भी जरुरत है आग उगलने वाली एक ऐसी सन्यासिन की जो उमा भारती की कमी को पूरा कर सके। कुल मिला कर बम धमाकों के ये आरोपी आज राजनेताओं की जरुरत बन गए हैं।अगर इनकी सजा हुई तो इसे सत्तारूढ़ कांग्रेस की साजिश कह कर हिन्दुओं में सहानुभूति बटोरेंगे और बच गए , तो टिकेट देकर चुनाव लड़ायेंगे,जिससे हिंदू उनकी तरफ़ झुकें।

2 टिप्‍पणियां:

prakash ने कहा…

Shivsena se Shrikant Purohit ko Ticket dene ka faisla galat hai. Mera kehna hai ki Abhi tak har koi party aise hi logo ko ticket dekar usko bada banathi hai Aur uske Aprad mitha deti hai. Toh ye bilkul galat hai. -PRAKASH MATRE.

SOHAIL ने कहा…

Achha Likha hai AAp ne.........